Chhattisgarh

₹3 करोड़ की कथित वित्तीय अनियमितताओं पर CDBE की बड़ी कार्रवाईरायपुर के Salem English School मामले में FIR की मांग, निष्पक्ष जांच पर जोर

Diocese Board seeks FIR over alleged ₹3 crore financial irregularities at Salem English School, Raipur. Departmental inquiry flags serious financial discrepancies; police action requested.

रायपुर | विशेष संवाददाता
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित प्रतिष्ठित Salem English School एक बड़े वित्तीय विवाद के केंद्र में आ गया है। Chhattisgarh Diocese Board of Education (CDBE) ने विद्यालय के पूर्व प्राचार्य वी.के. सिंह के कार्यकाल से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर पुलिस कमिश्नर, रायपुर के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराते हुए FIR दर्ज करने की मांग की है।

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डायोसिस प्रशासन के अनुसार, संस्था द्वारा गठित विभागीय जांच समिति (Departmental Enquiry Committee) की रिपोर्ट में लगभग ₹2.50 से ₹3.00 करोड़ तक की वित्तीय अनियमितताओं की आशंका जताई गई है। रिपोर्ट में विद्यालय निधि के उपयोग में गड़बड़ी, लेखा अभिलेखों में कथित हेरफेर तथा कर्मचारियों के EPF अंशदान की राशि समय पर जमा न किए जाने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।

₹1.80 करोड़ PF राशि बाद में जमा
संस्था का दावा है कि कर्मचारियों की भविष्य निधि (PF) से संबंधित लगभग ₹1.80 करोड़ की लंबित राशि को बाद में प्रशासनिक हस्तक्षेप के माध्यम से चरणबद्ध तरीके से जमा कराया गया, जिससे कर्मचारियों को राहत मिली। हालांकि यह प्रश्न बना हुआ है कि इतनी बड़ी राशि समय पर क्यों जमा नहीं की गई।

जांच के दौरान आरोप-प्रत्यारोप

डायोसिस प्रशासन ने यह भी संकेत दिया है कि जैसे-जैसे वित्तीय जांच आगे बढ़ी, उसी दौरान वर्तमान प्रभारी प्राचार्य श्रीमती रुपिका लॉरेंस के विरुद्ध कथित भ्रामक आरोपों का प्रसार शुरू हुआ। संस्था का कहना है कि यह प्रयास जांच प्रक्रिया से ध्यान भटकाने की मंशा से किया गया हो सकता है।

हालांकि, इस पूरे प्रकरण में पूर्व प्राचार्य या अन्य संबंधित पक्षों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

शासन आदेश का उल्लेख
संस्था ने 01 दिसंबर 2025 के शासन आदेश के अनुपालन की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा है कि विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियां सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं और विद्यार्थियों के हित सर्वोपरि हैं।

“निष्पक्ष जांच ही समाधान”

डायोसिस के बिशप धर्मगुरु ने कहा,
“हम किसी व्यक्ति विशेष को निशाना नहीं बना रहे हैं। हमारा उद्देश्य संस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। यदि कोई दोषी पाया जाता है तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।”

अब निगाहें पुलिस प्रशासन की कार्रवाई और संभावित आपराधिक जांच पर टिकी हैं। यदि FIR दर्ज होती है तो यह मामला राज्य के शिक्षा संस्थानों में वित्तीय पारदर्शिता को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।

Surendra Sahu

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