Chhattisgarh

स्कूल बच्चों के भविष्य का मंदिर है, सत्ता, साजिश और अराजकता का मंच नहीं सालेम इंग्लिश स्कूल प्रबंधन का निर्णायक प्रहार

School is the temple of children's future, not a platform for power, conspiracy and anarchy. A decisive blow to Salem English School management.

रायपुर स्थित सालेम इंग्लिश स्कूल में बच्चों की पढ़ाई, अनुशासन और शैक्षणिक वातावरण को सुनियोजित ढंग से बाधित करने वाली गतिविधियों पर अब प्रबंधन ने निर्णायक कार्रवाई की है। लंबे समय से कुछ शिक्षकीय एवं गैर-शिक्षकीय कर्मचारियों द्वारा विद्यालय को निजी स्वार्थ, गुटबाजी, अनुशासनहीनता और भीतरघात का अड्डा बनाने की कोशिश की जा रही थी, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जा सकता था। शिक्षा के नाम पर अराजकता फैलाने वालों को यह स्पष्ट संदेश है कि विद्यालय कोई राजनीतिक अखाड़ा नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य की पवित्र संस्था है।

यह तथ्य रिकॉर्ड पर है कि दिनांक 29.09.2025 को रजिस्ट्रार, फर्म्स एवं सोसायटी द्वारा पारित आदेश को सक्षम प्राधिकारी के समक्ष चुनौती दी गई थी। इसके पश्चात शासन के आदेश दिनांक 01.12.2025 के अनुसार जिला कलेक्टर, रायपुर को प्रशासक नियुक्त किया गया। प्रशासक द्वारा दिनांक 27.03.2026 को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष एवं वैधानिक चुनाव सम्पन्न कराया गया, जिसके परिणामस्वरूप नई प्रबंधन समिति का विधिवत गठन हुआ। वर्तमान प्रबंधन समिति पूर्ण वैधानिक अधिकारों के साथ संस्था के संचालन हेतु अधिकृत है, और अब किसी भी अवैध, भ्रामक या स्वार्थ-प्रेरित दबाव को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

विद्यालय प्रबंधन के संज्ञान में लगातार यह बातें आती रहीं कि कुछ कर्मचारी कक्षाओं में नियमित शिक्षण नहीं कर रहे थे, पढ़ाई के समय मोबाइल फोन एवं सोशल मीडिया में व्यस्त रहते थे, पाठ्यक्रम समय पर पूरा नहीं किया जा रहा था और अनुशासन की खुलेआम अवहेलना की जा रही थी। इससे यह स्पष्ट हो गया था कि कुछ लोग शिक्षण नहीं, बल्कि व्यवस्था को कमजोर करने में लगे हुए थे।

कुछ व्यक्तियों द्वारा विद्यालय परिसर और बाहरी माध्यमों से प्रबंधन, प्राचार्य एवं संस्था के विरुद्ध भ्रामक, मिथ्या और आधारहीन आरोपों का अभियान चलाया गया। यह कोई सामान्य असंतोष नहीं था, बल्कि विद्यालय के वातावरण को विषाक्त बनाने की सुनियोजित कोशिश थी, जिसका सीधा नुकसान बच्चों की पढ़ाई और अभिभावकों के विश्वास को हुआ।

विद्यालय केवल भवन नहीं होता, वह समाज की उम्मीद, अभिभावकों के त्याग और बच्चों के भविष्य का आधार होता है। जब शिक्षक और कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी छोड़कर विवाद, राजनीति और गुटबाजी में लग जाएँ, तब सबसे पहले चोट मासूम बच्चों पर पड़ती है। यही कारण है कि प्रबंधन ने अब कठोर रुख अपनाया है।

प्रबंधन एवं प्राचार्य द्वारा संबंधित कर्मचारियों को बार-बार सुधार का अवसर दिया गया। मौखिक निर्देश, लिखित मेमो, चेतावनी पत्र और कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, लेकिन सुधार की जगह टकराव, उपेक्षा और अवमानना का रवैया जारी रहा। जांच समिति की कार्यवाही की भी अवहेलना की गई, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि कुछ लोग संवाद नहीं, बल्कि टकराव चाहते हैं।

टर्मिनेट किए गए कर्मचारियों के नाम:

शिक्षकीय कर्मचारी: श्रीमती अंजुला मार्टिन श्रीमती संगीता सिंह,श्री ओ. पी. देवांगन,श्री प्रविशांत सालोमन,श्रीमती मेनका जार्ज,श्रीमती सपना जार्ज (तथाकथित प्रभारी प्राचार्य),श्रीमती श्रुति वानी,श्रीमती सरिता वानी,श्रीमती निवेदिता गांगुली,श्रीमती सना एजाज,श्रीमती पी. पी. बेनेट,श्रीमती शेलजा वैभव इफ्राईम,श्रीमती रूपाली ग्वाल यादव,श्रीमती रश्मी बाला जोगी,श्रीमती रश्मी जार्ज,श्रीमती सोनिया ठाकुर,श्रीमती दीपमाला जॉन,श्रीमती अर्शिया कुरैशी,श्रीमती संगीता तिर्की,श्रीमती नर्मता मार्टिन,श्रीमती जे. ए. बेरन,श्रीमती प्रतिक्षा रॉबिन्स,गैर-शिक्षकीय कर्मचारी:,23. श्रीमती ज्योति गार्डिया (कुमुदनी),24. श्रीमती विनिता बाला प्रकाश,25. श्रीमती मनोरमा कुमार,26. श्रीमती लीला निर्मलकर,27. श्रीमती गायत्री मानिकपुरी,28. श्रीमती दुर्गा निर्मलकर

उक्त कर्मचारियों के विरुद्ध संस्था सेवा नियमों, अनुशासनहीनता, शैक्षणिक दायित्वों में लापरवाही और संस्था-विरोधी गतिविधियों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की गई है। यह कार्रवाई किसी व्यक्तिगत प्रतिशोध का परिणाम नहीं, बल्कि संस्थागत अनुशासन और बच्चों के भविष्य की रक्षा के लिए उठाया गया आवश्यक कदम है।

प्रबंधन का यह भी स्पष्ट कहना है कि जो लोग शिक्षा की आड़ में राजनीति, दबाव और अव्यवस्था को बढ़ावा देते हैं, उनके लिए इस संस्था में कोई स्थान नहीं है। शिक्षा को कलंकित करने वालों के विरुद्ध आगे भी सख्त और वैधानिक कदम उठाए जाएंगे।

सालेम इंग्लिश स्कूल भविष्य में विद्यार्थियों को सुरक्षित, अनुशासित, संस्कारित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध रहेगा। अभिभावकों और नागरिकों से अपील है कि वे किसी भी भ्रामक प्रचार, झूठे नैरेटिव या गुमराह करने वाली सूचनाओं के झांसे में न आएँ और बच्चों के भविष्य की रक्षा में प्रबंधन का साथ दें।

अन्य शिक्षण संस्थाओं के लिए सीधी अपील:

छत्तीसगढ़ डायोसिस बोर्ड ऑफ एजुकेशन (CDBE) सभी विद्यालय प्रबंधन से आग्रह करता है कि किसी भी शिक्षक या कर्मचारी की नियुक्ति से पूर्व उसकी सेवा-जानकारी, आचरण-रिकॉर्ड और No Objection Certificate (NOC) का पूरा सत्यापन अनिवार्य रूप से किया जाए। आज अगर एक संस्था में भीतरघात और अनुशासनहीनता को नजरअंदाज किया गया, तो कल यही बीमारी दूसरी संस्था को भी जकड़ सकती है।

कानूनी स्थिति

यह भी संज्ञान में आया है कि श्रीमती नीलिमा रॉबिनसन एवं श्री अजय जॉन द्वारा कथित एवं आधारहीन एफ.आई.आर. के आधार पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय में दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट द्वारा निरस्त कर दिया गया। इससे यह और अधिक स्पष्ट होता है कि संस्था के विरुद्ध फैलाए गए आरोपों का आधार कमजोर, भ्रामक और असत्य था।

Nitin Lawrence

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