Chhattisgarh

सांसद निधि के 15 लाख के भवन पर घमासान: निर्माण शुरू होते ही फिर शिकायत—आखिर किसके हित में रोका जा रहा काम?,प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग..

गौरेला पेंड्रा मरवाही:- सरस्वती शिशु मंदिर पेंड्रा में बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद एवं केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू की सांसद निधि से लगभग 15 लाख रुपये की लागत से स्वीकृत भवन निर्माण कार्य को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। नगर पालिका परिषद पेंड्रा द्वारा निविदा प्रक्रिया पूर्ण किए जाने के बाद निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया था। इसके बाद शिशु मंदिर समिति के सदस्यों द्वारा विधिवत भूमि पूजन भी किया गया।

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निर्माण कार्य के दौरान सरस्वती शिशु मंदिर समिति के अध्यक्ष नीरज जैन द्वारा भवन निर्माण की गुणवत्ता को लेकर शिकायत की गई। शिकायत के बाद नगर पालिका परिषद के वर्तमान उपअभियंता सुरेंद्र श्रीवास ने स्थल का निरीक्षण किया और निर्माण एजेंसी को आवश्यक तकनीकी सुधार के निर्देश दिए।

बताया गया कि भवन के पीछे के प्लिंथ में आरसीसी वॉल सहित अन्य आवश्यक तकनीकी सुधार किए जाने हैं। उपअभियंता श्री श्रीवास ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किए जाने की बात कही तथा स्थल पर उपस्थित रहकर निर्माण कार्य की निगरानी करने की बात कही। इसके बाद 10 सितंबर 2026 को निर्माण कार्य पुनः प्रारंभ किया गया।

निर्माण शुरू होते ही फिर शिकायत, उठे सवाल..

निर्माण कार्य दोबारा प्रारंभ होने के बाद फिर शिकायत सामने आने से मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि तकनीकी अधिकारी द्वारा स्थल निरीक्षण कर आवश्यक सुधार के निर्देश दिए जा चुके हैं और निर्माण की गुणवत्ता की निगरानी की जा रही है, तो बार-बार शिकायतों के पीछे वास्तविक कारण क्या है?स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निर्माण में तकनीकी कमी है तो उसका समाधान तकनीकी जांच के आधार पर किया जाना चाहिए, जबकि गुणवत्ता मानकों के अनुरूप कार्य हो रहा है तो अनावश्यक रूप से विकास कार्य को बाधित नहीं किया जाना चाहिए।

विद्यालय के पीछे की जमीन को लेकर भी चर्चा..

मामले में विद्यालय के पीछे स्थित जमीन को लेकर भी स्थानीय स्तर पर विभिन्न चर्चाएं सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि गोरेला क्षेत्र के एक जायसवाल परिवार द्वारा उक्त भूमि अमरकंटक स्थित शांति कुटीर आश्रम को मंदिर निर्माण के उद्देश्य से दान किए जाने की बात कही जाती है। वहीं, भूमि के उपयोग, स्वामित्व एवं कथित लेन-देन को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में भूमि से जुड़े दस्तावेजों की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

यदि विद्यालय के पीछे की भूमि पर कॉलोनी अथवा अन्य निर्माण की कोई योजना है और उसके लिए विद्यालय की भूमि से रास्ता निकालने का दावा किया जा रहा है, तो राजस्व अभिलेख, भूमि स्वामित्व, दानपत्र, बिक्री अथवा हस्तांतरण संबंधी दस्तावेज और प्रस्तावित मार्ग की स्थिति की जांच आवश्यक हो जाती है।स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि कहीं विद्यालय की भूमि से रास्ता उपलब्ध कराने के लिए किसी प्रकार का दबाव या अन्य प्रयास तो नहीं किया जा रहा। हालांकि इस संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले प्रशासनिक एवं राजस्व जांच जरूरी है।

सांसद निधि का पैसा विवाद की भेंट न चढ़े : राकेश जालान

नगर पालिका अध्यक्ष राकेश जालान ने कहा कि सांसद निधि से स्वीकृत राशि जनता के विकास और बच्चों की सुविधा के लिए है। यदि निर्माण कार्य में कोई तकनीकी कमी है तो जांच कर उसे तत्काल दूर किया जाना चाहिए, लेकिन यदि कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुसार किया जा रहा है तो अनावश्यक रूप से विकास कार्य को बाधित करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारी प्राथमिकता भवन का गुणवत्तापूर्ण और पारदर्शी निर्माण है। सांसद निधि से स्वीकृत राशि का सदुपयोग होना चाहिए और बच्चों के लिए स्वीकृत भवन हर हाल में गुणवत्तापूर्वक तैयार होना चाहिए।

यदि इस निर्माण कार्य को रोकने के पीछे किसी व्यक्ति, संस्था या भू-व्यवसाय से जुड़ा कोई हित है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। साथ ही विद्यालय की भूमि और उसके आसपास की जमीन से संबंधित सभी दस्तावेजों की भी जांच की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।”

तकनीकी और राजस्व जांच की मांग..

राकेश जालान ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष तकनीकी एवं राजस्व जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि विद्यालय की भूमि, आसपास की जमीन के स्वामित्व, दान एवं रास्ते से संबंधित दावों की जांच के साथ-साथ सांसद निधि से स्वीकृत भवन निर्माण की गुणवत्ता की भी जांच होनी चाहिए।उन्होंने कहा कि जांच में यदि किसी भी पक्ष की गलती सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए, लेकिन बच्चों के लिए स्वीकृत विकास कार्य को अनावश्यक विवाद के कारण लंबित नहीं रखा जाना चाहिए।

अब देखने वाली बात होगी कि जिला प्रशासन इस पूरे मामले में तकनीकी और राजस्व स्तर पर क्या जांच करता है और जांच के बाद वास्तविक स्थिति क्या सामने आती है। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि सांसद निधि से स्वीकृत भवन निर्माण कार्य निर्धारित गुणवत्ता के साथ समय पर पूरा हो पाता है या भूमि एवं रास्ते से जुड़े विवादों के कारण प्रभावित होता है।

Sumit Jalan Marwahi/Pendra

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