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प्रतिभा के गढ़ के जिम्मे एक और नई ख्याति,0.4 mm की माइक्रो गणेश मूर्ति

भिलाई। नक्सलियों के अलावा अपनी प्रतिभाओं की ख्याति और अलग कर गुजरने की चाहत लिए छत्तीसगढ़ वैसे तो पूरे देश में वाहवाही बटोर रहा है। तो वही प्रदेशवासी भी अपने प्रदेश का नाम ऊंचा करने के लिए ऐसे अनोखे अनोखे कार्य कर रहे हैं जिसके बारे में सोच पाना भी शायद कई लोगों के लिए संभव ही नहीं। कुछ ऐसा ही अलग और अनूठा कार्य कर दिखाया है भिलाई के शिल्पकार अंकुश देवांगन ने, जिसके चलते अब भिलाई सबसे छोटी मूर्ति के लिए विश्व में जाना जाने लगा है।

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भिलाई के शिल्पकार अंकुश देवांगन एक से 10 इंच तक की नैनो मूर्तियों के लिए तो जाने ही जाते हैं । अब उन्होंने 0.4 एमएम की माइक्रो गणेश मूर्ति बनाकर अपना नाम लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज करा लिया है।

बता दें 0.4 एमएम का साइज इतना छोटा होता है कि वह सहज आंखों से तो दूर पावर का चश्मा लगाकर भी नहीं देखा जा सकता है लेकिन अंकुश के अंदर कुछ अलग कर गुजरने का जुनून इस हद तक सवार था कि वह घड़ी साज के पास गए । उन्होंने उससे पूछा कि क्या उनके लेंस से भी कोई अधिक पावर का लेंस आता है , जिससे हाफ एमएम की चीज पर कुछ लिखा जा सके । वहां उन्हें पता चला कि एक लेंस है जो विशेष रूप से आर्डर करने पर आता है। उस लेंस को अंकुश ने मंगवाया और उसी के सहारे से उस मूर्ति को तैयार किया।

इसके अलावा उन्होंने चावल में ताजमहल , पीसा की मीनार , स्टैचू ऑफ लिबर्टी , महापुरुषों और देवी देवताओं के चित्र बनाने शुरू किए । धीरे – धीरे उनकी कला में इतना निखार आया कि उन्होंने एक ही चावल में 7-8 देवी देवताओं के चित्र बना डाले। इसके अलावा अंकुश ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक इंच छोटी प्रतिमा तैयार की है । इस प्रतिमा को मौका मिलने पर वह खुद प्रधानमंत्री को भेंट करना चाहते हैं ।

बता दें कि छोटी मूर्तियों को बनाने के लिए आलपिन , निडिल और ब्लेड जैसी घरेलू चीजों का उपयोग करते हैं । इन्हीं की मदद से उन्होंने अब तक सैकड़ों छोटी से छोटी मूर्तियों को बनाया है । वह कहते हैं कि चावल के दाने में पेंटिंग करने के लिए दुनिया में अभी तक कोई ब्रश नहीं बना है। उन्होंने चावल के दाने में पेंटिंग करने के लिए गिलहरी के बाल का उपयोग किया। उसके बाद धीरे – धीरे पेटिंग ब्रश के एक से दो बाल का उपयोग करके पेंटिंग्स तैयार करते हैं।

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