अवैध रेत परिवहन के दौरान युवक की मौत मामले में बड़ा फैसला: ट्रैक्टर चालक को 5 साल की सजा, मालिक भी दोषी करार..
गौरेला पेंड्रा मरवाही:- द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पेंड्रारोड ज्योति अग्रवाल की अदालत ने अवैध रेत परिवहन से जुड़े एक चर्चित मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए ट्रैक्टर चालक और वाहन मालिक को दोषी ठहराया है। अदालत ने लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाकर युवक की मौत कारित करने वाले चालक को 5 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।

यह मामला 26 मई 2025 का है, जब मरवाही थाना क्षेत्र के ग्राम लोहारी स्थित चलचली मोड़ के पास एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ था। मृतक ऋषि कुमार दीक्षित मोटरसाइकिल से मरवाही से अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान पीछे से आ रहे सोनालिका ट्रैक्टर-ट्रॉली ने उन्हें टक्कर मार दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दुर्घटना के बाद चालक रविशंकर पाव मौके से भागने का प्रयास कर रहा था और इसी दौरान ट्रैक्टर का चक्का मृतक के ऊपर चढ़ जाने से उसकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई।
मामले की शिकायत मृतक के चचेरे भाई दानवेन्द्र प्रताप सिंह द्वारा थाना मरवाही में दर्ज कराई गई थी। पुलिस विवेचना में यह साबित हुआ कि घटना के समय ट्रैक्टर रविशंकर पाव चला रहा था। जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि ट्रैक्टर और ट्रॉली का कोई वैध बीमा नहीं था और वाहन स्वामी सुखलाल केंवट ने बिना बीमा के ही वाहन का संचालन कराया था।
अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर चालक रविशंकर पाव (27 वर्ष) को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 106(1) के तहत 5 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 5 हजार रुपये अर्थदंड तथा मोटरयान अधिनियम की धारा 146/196 के तहत 2 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। वहीं वाहन स्वामी सुखलाल केंवट (73 वर्ष) को भी बिना बीमा के वाहन संचालन कराने के लिए मोटरयान अधिनियम की धारा 146/196 के तहत दोषी ठहराते हुए अर्थदंड की सजा सुनाई गई। इस प्रकरण में शासन की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक कौशल सिंह ने प्रभावी पैरवी की।
एसडीओपी के आश्वासन से लेकर सजा तक पहुंचा मामला..
घटना के समय यह पूरा मामला अवैध रेत उत्खनन एवं परिवहन से जुड़ा हुआ था। हादसे के बाद आक्रोशित लोगों द्वारा वाहन को नुकसान पहुंचाने का प्रयास भी किया गया था। उस दौरान मौके पर पहुंचे तत्कालीन एसडीओपी दीपक मिश्रा ने लोगों को समझाइश देते हुए भरोसा दिलाया था कि निष्पक्ष विवेचना के आधार पर चालक और वाहन मालिक के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई कर उन्हें सजा दिलाई जाएगी। करीब एक वर्ष बाद अदालत के फैसले ने उस आश्वासन को सच साबित कर दिया है।
यह फैसला अवैध परिवहन, सड़क सुरक्षा नियमों की अनदेखी और बिना बीमा वाहनों के संचालन के खिलाफ एक सख्त संदेश माना जा रहा है।





