Chhattisgarh

हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला, विवाहित बेटी पिता पर आश्रित तो कोल इंडिया में मिल सकती है अनुकंपा नियुक्ति

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि कोल इंडिया के कर्मचारी की विवाहित बेटी पिता के वेतन पर निर्भर है तो वह अनुकंपा नियुक्ति के लिए पात्र हो सकती है। हालांकि इससे पहले अफसरों को जांच की जानी चाहिए कि क्या वास्तव में विवाहित बेटी पिता के वेतन पर आश्रित है।

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एसईसीएल की चरचा खदान में कार्यरत कर्मचारी की सेवा के दौरान 14 अप्रैल 2021 को मृत्यु हो गई थी। उनकी पत्नी शोभा परिदा ने अपने बेटे को अनुकंपा नियुक्ति देने के लिए एसईसीएल प्रबंधन के समक्ष आवेदन किया। बेटे की उम्र अधिक होने का हवाला देते हुए प्रबंधन ने 16 मई 2021 को आवेदन खारिज कर दिया। इसके बाद शोभा ने 19 मई 2021 को एसईसीएल प्रबंधन से संपर्क कर विवाहित बेटी नर्मदा को अनुकंपा नियुक्ति देने की मांग की और आवेदन पेश किया। आवेदनकर्ता ने बताया कि बेटी पिता पर आश्रित है और भरण पोषण भी पिता की कमाई से होता है।

मामले की सुनवाई छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस एके गोस्वामी और जस्टिस संजय अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई। डिवीजन बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के परिप्रेक्ष्य में कहा कि याचिकाकर्ता की विवाहित बेटी होने के नाते आश्रित रोजगार के लिए भी हकदार है। डिवीजन बेंच ने एसईसीएल प्रबंधन को याचिकाकर्ता की बेटी को अनुकंपा नियुक्ति देने के निर्देश जारी किए हैं। डिवीजन बेंच ने कहा कि आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के 45 दिनों के अंदर यथाशीघ्र प्राथमिकता के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी की जाए।

कोल इंडिया की ओर से जारी गाइडलाइन में दो श्रेणियों में अनुकंपा नियुक्ति के पात्रों की सूची बनाई गई है। प्राथमिक श्रेणी में विधवा पत्नी, पुत्र, अविवाहित पुत्री, कानूनी दत्तक संतान तो द्वितीय श्रेणी में ससुर पर आश्रित विधवा बहू, विधवा बेटी, दामाद आदि आते हैं। इस पर डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में विस्तार से टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि विवाहित बेटी का बहिष्कार अनुचित है और भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 के तहत निर्धारित प्रविधानों का उल्लंघन है।

Surendra Sahu

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