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500 में पति ने कोठे में बेचा,फिर बनी माफिया क्वीन वेश्यावृत्ति में होते हुए भी गंगूबाई काठियावाड़ी क्यों थी लोगों के लिए मसीहा…

इन दिनों बॉलीवुड में बायोपिक फिल्मे बनाने का क्रेज बढ़ गया है। जिसके चलते किसी भी प्रभावित व्यक्ति से जुड़े उनकी जीवनशैली को दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया जा रहा है और दर्शकों का प्यार भी इन फिल्मों को मिल रहा है। इसी तारतम्य में आज हम बात करेंगे ऐसी हस्ती की जो वैश्यावृत्ति के धंधे में होते हुए भी लोगों के लिए एक मसीहा थी। भले ही वो मजबूरी में ही सही गलत धंधे में थी लेकिन उनका दिल खरा सोना था।

हम आज बात करेंगे गंगूबाई काठियावाड़ी के असली जीवन के बारे में जिसकी रील भूमिका आलिया भट्ट निभा रही हैं। उनका दमदार लुक और भूमिका की सराहना केवल फिल्म के टीजर के रिलीज होने से ही शुरु हो गई है।

कई लोगों के मन में यह सवाल हो सकता है कि गंगूबाई काठियावाड़ी आखिर हैं कौन, जिनके जीवन पर एक फिल्म तक बन गई? गंगूबाई काठियावाड़ी वेश्यावृत्ति के पेशे से जुड़ी थीं। मुंबई में एक कोठा चलाती थीं लेकिन उनका परिचय केवल इतने में सीमित नहीं होता। गंगूबाई काठियावाड़ी हालात के चलते भले ही पेशे से वेश्यावृत्ति में आ गई हों लेकिन जो काम उन्होंने महिलाओं और बच्चों के लिए किया, वह एक मिसाल बन गया।

गंगूबाई काठियावाड़ी का असली नाम गंगा हरजीवनदास काठियावाड़ी था। सन 1939 में गुजरात के काठियावाड़ में एक सम्पन्न परिवार में जन्मी गंगूबाई जिनके परिवार के लोग वकालत से जुड़े थे उनकी जिंदगी तब बदल गयी जब वह प्यार में पड़ गयी।

  500 पाने के लिए पति ने कोठे में बेचा

बचपन से ही अभिनेत्री बनने का सपना देखने वाली गंगूबाई काठियावाड़ी जब 16 साल की थीं, तब उनको अपने पिता के अकाउंटेंट रमणीकलाल से प्यार हो गया। परिवार वाले इस रिश्ते के लिए न मानते इसलिए उन्होंने लव मैरिज कर ली और पति संग भाग कर मुंबई आ गईं। लेकिन वह कभी सोच भी नही सकती थी कि उन्हें प्यार करने का ऐसा सिला मिलेगा और उनकी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी।महज 500 रुपये में गंगूबाई को उनके पति ने मुंबई में एक कोठे पर बेच दिया। गंगूबाई की स्थिति ऐसे मजधार में आकर अटकी थी कि न तो वह परिवार के पास वापस जा सकती थी और न ही कोठे से बच सकती थी। हालत के सामने हार मानकर उसे वेश्यावृत्ति में आना पड़ा।

करीम लाला को बनाया भाई, बनी सबसे बड़ी माफिया क्वीन

उन दिनों मशहूर डाॅन करीम लाला हुआ करता था, जिसके लिए शौकत खान नाम का बदमाश काम करता था। शौकत खान ने गंगूबाई के कोठे पर जाकर उसके साथ जबरदस्ती की। जिसके कारण गंगूबाई को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। लेकिन हालातों से जूझ कर गंगूबाई इस हद तक निडर हो गयी थी गंगूबाई ने शौकत खान को सजा दिलाने की ठान ली और सीधे करीम लाला के पास जाकर उसकी शिकायत की। करीम लाला ने शौकत खान को कड़ी सजा दी। इसके बाद गंगूबाई ने करीम लाला को राखी बांध कर उसे अपना भाई बना लिया। जिससे पूरे इलाके में उसका रौब हो गया। बाद में गंगूबाई मुंबई की सबसे बड़ी महिला डाॅन की लिस्ट में शामिल हो गई।

 महिलाओं और अनाथ बच्चों के लिए बनी ढाल

गंगूबाई भले ही कोठेवाली थीं, भले ही डाॅन के तौर पर मशहूर थीं लेकिन उन्होंने कई ऐसे सकारात्मक कदम उठाए जो आगे चल कर मिसाल बन गई। गंगूबाई ने कोठे पर किसी ऐसी महिला को नहीं रखा जो वेश्यावृत्ति नहीं करना चाहती हो। बिना महिला की इजाजत के उसके साथ कोठे पर जबरदस्ती नहीं की जा सकती थी। इतना ही नहीं, जो लड़कियां गंगूबाई की तरह धोखे से कोठे पर पहुंच जाती, उन्हें वापस उनके घर भेजने की भी कोशिश की। गंगूबाई काठियावाड़ी ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए आवाज उठानी शुरू की।गंगूबाई ने सेक्सवर्कर, अनाथ बच्चों और धोखे से कोठे पर लाई जाने वाली लड़कियों की सुरक्षा के लिए काम किए।

गंगूबाई के कार्य से जब प्रभावित हुए जवाहरलाल नेहरू

गंगूबाई कमाठीपुरा में हुए घरेलू चुनावों में शामिल हुईं और जीत हासिल की।उन्होंने एक बार पंडित जवाहरलाल नेहरू से भी मुलाकात की थी। उन दिनों गंगूबाई के काम और व्यक्तित्व से नेहरूजी काफी प्रभावित हुए थे।

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