Chhattisgarh

MP के दो पारंपरिक कृषि उत्पादों को GI टैग, बालाघाट के चिन्नौर धान और रीवा के सुंदरजा आम को शामिल किया गया

MP News: मध्य प्रदेश के दो पारंपरिक कृषि उत्पादों बालाघाट के चिन्नौर धान और रीवा के सुंदरजा आम को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग मिल गया है. इससे इन उत्पादों की विशिष्ट पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है.

विधानसभा में पूछे गए प्रश्न के लिखित जवाब में कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने बताया कि जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के माध्यम से इन दोनों उत्पादों का पंजीयन कराया गया. चिन्नौर धान के लिए 60 किसानों और सुंदरजा आम के लिए 20 किसानों का समिति में पंजीयन किया गया है.

‘किसी भी GI टैग को निरस्त नहीं किया गया’

मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदेश में किसी भी उत्पाद का जीआई टैग निरस्त नहीं किया गया है. लुवाई धान, टर्री भरी धान और सातिया धान को भी जीआई टैग दिलाने की प्रक्रिया जारी है. वहीं चार अन्य उत्पादों बैंगनी अरहर, नागफनी कुटकी, सिताही कुटकी और महाकौशल क्षेत्रीय धान को जीआई रजिस्ट्री की वेबसाइट पर विज्ञापित किया जा चुका है.

बासमती को लेकर कानूनी विवाद

मध्यप्रदेश के बासमती चावल को जीआई टैग दिलाने के प्रयास 2008 से जारी हैं. जीआई रजिस्ट्री चेन्नई ने पहले मध्यप्रदेश को बासमती के दायरे में शामिल नहीं किया था. बाद में प्रदेश सरकार की आपत्ति पर संशोधित आवेदन की प्रक्रिया चली. यह मामला मद्रास हाई कोर्ट तक पहुंचा, जहां 27 फरवरी 2020 को याचिका निरस्त कर दी गई थी. हालांकि अब सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए मामले में आगे की सुनवाई का रास्ता साफ किया है.

प्रदेश सरकार का कहना है कि बासमती को जीआई टैग दिलाने के लिए कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर प्रयास जारी रहेंगे, ताकि किसानों को इसका लाभ मिल सके.

Desk idp24

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!