Raipur

IDP24 न्यूज़ खबर का असर: निलंबित हुआ वसूलीबाज ट्रैफिक पुलिस

रायपुर। तेलीबांधा क्षेत्र में ट्रैफिक पुलिस अजित साहू द्वारा एक व्यक्ति से चालान काटने के एवज में पैसों की मांग करने की खबर आईडीपी 24 न्यूज़ ने प्रमुखता से दिखाई थी।जिसके बाद अब इस खबर का असर हुआ है वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रशांत अग्रवाल ने घूसखोर पुलिस अजीत साहू के खिलाफ कड़ी कार्यवाई करते हुए उसे निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया है।

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बता दें कि ट्रैफिक पुलिस अजीत साहू व्यक्ति से पैसों की मांग कर रहा था। जब व्यक्ति ने 200 रुपये नहीं होने से मना किया और 100 रुपये लेने की बात कही तब ट्रैफिक पुलिस ने उसे थाने भेजने की धमकी देते हुए कहा कि, आजकल 100 में कुछ नहीं होता 200 देना है तो बात करो वरना थाने जाओ। पुलिस वाले होने के बावजूद इस तरह से लोगों से ब्लैकमेलिंग करना बेहद शर्म की बात है। थोड़े से पैसों के लिए पुलिस वाले लोगों को नियम उल्लंघन करने की छूट खुद दे रहे हैं जिसकी सजा इन लोगों को ही भुगतनी पड़ती है।

पुलिस वालों की मनमानी इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि, यह अब ट्रैफिक में पदस्थ एडिशनल एसपी मंडावी के आदेशों का पालन करते हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के आदेश इनके लिए कोई मायने नहीं रखते क्योंकि मुख्यमंत्री से भी बड़े एडिशनल एसपी मंडावी हो चुके हैं। जिनके लिए भी ऐसी जानकारी सूत्रों से मिलते रहते हैं कि यह भी इसी तरह वसूली के कृत्यों में लिप्त हैं। यहां तक कि सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक एएसपी पुलिस रेगुलेशन के अनुसार विभाग में पदोन्नति के बाद उनका स्थानांतरण किया जाता है लेकिन एएसपी ट्रैफिक ने सीएम के 3 साल वाले स्थानांतरण को अनदेखा करते हुए अपने करीबी वसूली सिपाहीयो को पदोन्नत होने के बावजूद भी यातायात में रखे हुए हैं।

सूत्रों के मुताबिक यातायात में प्रत्येक यातायात जोन में प्रभारी बनने के लिए एसपी महोदय का रेट लिस्ट है। यहां तक कि प्रत्येक एएसआई से लेकर टीआई स्तर के लोग महोदय को हिस्सा लाकर देते हैं! यातायात एएसपी के अधीनस्थ कुछ वर्मा स्टाफ जो लंबे समय से एक ही स्थान पर उनके लिए वसूली करने का काम कर रहे हैं,उनके लिए किसी भी प्रकार की पुलिस स्थानांतरण नीति लागू नहीं होती है। यहां तक अब इन्हीं के स्टाफ के लोग बोलते हैं कि एएसपी सर के डर से उनके नए कपड़ा वाशिंग सेंटर में कपड़े ड्राई क्लीन हेतु भिजवाते है नहीं तो एएसपी सर स्थानांतरण करने की धमकी देते हैं।

यही कारण है कि जब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राजधानी में बढ़ रहे अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए आदेश जारी करते हुए कहा था कि कोई भी पुलिस कर्मचारी अधिकारी 3 साल से ज्यादा एक ही स्थान में पदस्थ नहीं हो सकते इसके बावजूद भी पुलिस के उच्च अधिकारी सीएम की बातों को धता बताते हुए अपनी मनमानी करने और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का काम कर रहे हैं। इसी कड़ी में वसूली करने वाले अजीत कुमार साहू सिपाही को साफ तौर पर 3 साल 4 साल वाले सूची में इनका तबादला किया जाना बनता था मगर उच्च अधिकारियों ने ऐसे भ्रष्ट सिपाहियों को शहर में रखकर वसूली अभियान को जारी रखा है। जो तीन से चार साल से एक ही स्थान पर पदस्थ है और धड़ल्ले से इसी तरह लोगों से वसूली करने का काम करते आ रहे हैं। इनके कानों में मुख्यमंत्री के आदेशों की गूंज शायद सुनाई नहीं पड़ी या फिर पुलिस के उच्च अधिकारी जिन्होंने अपने खास लोगों को वसूली करने के लिए 3 से 4 साल तक एक ही जगह में तैनात कर रखा है वह अपने आपको भी मुख्यमंत्री के आदेशों से बड़ा समझते हैं। उन्हें लगता है कि मुख्यमंत्री भी उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकते और अगर गलती से कोई पुलिस सिपाही इस तरह से वसूली करते पकड़ा जाता है तो उन्हें सस्पेंड करने का दिखावा किया जाता है। लेकिन गुजारा भत्ता तो उनको मिलते रहता है। ऐसे में सस्पेंड होने के बावजूद भी ऐसे पुलिस सिपाहियों को कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि उन्हें पता है कि एक समय बाद वापस उन्हें उसी जगह में पदस्थ कर दिया जाएगा और यह बदस्तूर अपना वसूली का काम जारी रखेंगे। जैसे कि टाटीबंध से संजीत सिंह जो कि लेन देन के मामले में लाइन अटैच हुए फिर वैसे ही उन्हें 2 महीने बाद वही फिर से स्थान्तरण कर दिए गए।

पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की जाती और इन्हें सजा के तौर पर सीधे नौकरी से हाथ भी नहीं धोना पड़ता इसीलिए इनकी मनमानी चरम पर है।

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